रांची(RANCHI): झारखंड के जेलों में अपराध की "व्यूह रचना" तैयार होती है और फिर बाहर गुर्गे घटना को अंजाम देते है. कई एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आती रही है, लेकिन सरकार जेलों में अपराधियों की नाक में नकेल डालने में नाकाम होती रही है. नतीजा है कि ताबड़तोड़ घटनाएं हो रही है. दहशत फैलाने के लिए बीच सड़क पर प्रदेश की राजधानी रांची में भी गोलियां मारी जा रही है. यह बात अलग है कि बिट्टू खान हत्याकांड के बाद रांची पुलिस थोड़ी सीरियस हुई और सातवें दिन घटना को अंजाम देने वाले कम से कम आधा दर्जन अपराधियों को धर दबोचा है. उनके पास से हथियार भी बरामद हुए है. पुलिस का मानना है कि बिट्टू खान की हत्या के पीछे वर्चस्व कायम करना है. जेल में बंद अपराधी राज वर्मा की योजना पर उसके गुर्गों ने घटना को अंजाम दिया. इस घटना की फुलप्रूफ योजना जेल में ही बनने का पुलिस ने दावा किया है.
6 जून को बिट्टू खान की हत्या गोली मारकर कर दी गई थी
रांची के एसएसपी कौशल किशोर के अनुसार 6 जून को बिट्टू खान की हत्या गोली मारकर कर दी गई थी. इसके बाद सिटी एसपी के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और उसके बाद दिन- रात छापेमारी हुई. छापेमारी के बाद छह को गिरफ्तार किया गया. इनके पास से हथियार भी बरामद किए गए है. जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उन पर पहले से भी कई मामले दर्ज है. घटना के बारे में एसएसपी ने बताया कि दो बाइक पर सवार होकर शूटर आए थे. दो अन्य लोग आगे से रेकी कर रहे थे और लोकेशन बता रहे थे. इस हत्याकांड में और लोग भी शामिल हैं, उनकी पहचान हो गई है, जल्द ही वह भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे. एसएसपी ने यह भी राज खोला की कालू लंबा हत्याकांड में भी बिट्टू खान की संलिप्तता थी. बिट्टू खान की हत्या के पीछे भी वर्चस्व कायम करना ही मकसद था. यह घटना चौंकाने वाली थी और इसका असर दूसरे जिलों में भी पड़ा. झारखंड के इस बहुचर्चित हत्या कांड के बाद मुख्यमंत्री तक को अपराध नियंत्रण के लिए विशेष बैठक करनी पड़ी. लेकिन अगर सरकार जेलों से मर्डर और रंगदारी की "व्यू रचना" करने वाले अपराधियों पर जब तक जेल में नियंत्रण नहीं पाएगी, पुलिस की किरकिरी होती रहेगी और जनता डरे -सहमे रहने को बाध्य होती रहेगी.
रिपोर्ट : समीर/ सत्यभूषण सिंह
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