रांची(RANCHI)- जैसे-जैसे मानसून में देरी हो रही है, कभी बिहार का शिमला कहे जाने वाले राजधानी रांची में दो घूंट पानी का संकट गहराता जा रहा है, हालत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब नगरनिगम की टीम को मधुकम, चुन्ना भट्टा रोड, कैलाश मंदिर रोड नंबर 6, 9, कोकर, किशोरगंज, इरगू टोली, इंद्रपुरी हरमू, पहाड़ी टोला, हिंदपीढ़ी जैसे मुहल्लों में टैंकर पहुंचाने के पहले उसकी सुरक्षा के लिए पुलिस को सूचना देनी पड़ रही है.

पानी का टैंकर पहुंचते ही लूटने की मच जाती है होड़

इन मुहल्लों में नगर का टैंकर पहुंचते ही लूटने की होड़ मच जाती है, जोर जबरदस्ती का दौर शुरु हो जाता है, हर किसी की कोशिश टैंकर के पानी को अपने डोल-डब्बे में डाल लेने की होती है, दो घूंट पानी की यह तरस सिर्फ मधुकम, हिंद पीढ़ी, पहाड़ी टोला, विद्यानगर, जमुना नगर, गंगा नगर जैसे स्लम एरिया की ही नहीं है, हाई फाई कहे जाने और मोरहाबादी और उसके निकटवर्ती सरना टोली और एलदहालतू जैसे इलाकों की भी स्थिति यही है. सुबह सुबह इन इलाकों में बीच सड़क पर हाथ में डोल बाल्टी के साथ महिलाओं का संघर्ष आम है. मोरहाबादी के कई फ्लैटेरों को अब अपने रिश्तेदारों के पास शरण लेना पड़ रहा है, उनके बोरिंग फेल हो चुके है.

झूनझूना साबित हुआ निगम का पाइपलाइन  

हालांकि नगर निगम का दावा है कि जिन जिन इलाकों में निगम का पाइपलाइन बिछा है, उन- उन इलाकों में पानी की नियमित आपूर्ति जारी है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि धुर्वा, जगरन्नाथपुर, हटिया जैसे इलाकों में निगम के पाइपलाइन से चुली भर भी पानी नहीं आ रहा है. लोगों में कोहराम की स्थिति है, इस तपती धूम में पीने के पानी के साथ ही दूसरे दिनचर्या के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ा रहा है,  पानी की इस किल्लत के बीच निगम ने 10 नये टैंकरों की खऱीद का दावा किया है, दावा है कि 45 से अधिक टैंकरों से 370 स्थानों पर जलापूर्ति की जा रही है.

विशेषज्ञों की सलाह

लेकिन ये दावे करीबन हर बार किये जाते हैं और  हर बितता साल राजधानी वासियों को संकट गहराता जाता है. विशेषज्ञों का दावा है कि राजधानी वासियों की प्यास बुझाने के लिए टैंकरों की खरीद समाधान नहीं है, निगम को इसका स्थाई समाधान खोजना होगा, नये बसावटों को नियंत्रित करते हुए बहुमंजली इमारतों के निर्माण पर रोक लगानी होगी. दो दो हजार फीट धऱती के सीने को चीर आप इस जल संकट को और भी गहरा बना रहे हैं.