धनबाद(DHANBAD): अभी तो बिहार का बालू जांच के दायरे में है. रिमोट से बिहार में बालू का धंधा करने वाले धनबाद के "धनपशु" निशाने पर है. लेकिन 40 साल पहले भी धनबाद सहित एकीकृत बिहार से लेकर दिल्ली तक  बालू ने तहलका मचा रखा था. इसी बालू ने कोलकाता की जी पी अग्रवाल एंड कंपनी के ऑडिटर एसएस दास की  धनबाद में हत्या करा दी थी. सूत्रों के अनुसार ऑडिटर कंपनी की टीम दास के नेतृत्व में बीसीसीएल के एरिया छह  में हुए बालू घोटाले की जांच करने आई थी. पहले तो दास को समझाने की कोशिश की गई, कथित रूप से रिश्वत की पेशकश की गई ,जब वह नहीं माने तो उनका अपहरण कर हत्या करा दी गई थी. लाश को रेलवे ट्रैक पर रख दिया गया था. उनके पॉकेट में एक रेलवे का टिकट भी डाला गया था, जिसे लोगों को संदेह हो कि वह ट्रेन से गिरकर मर गए है. लेकिन जब इसकी जांच आगे बढ़ी तो चौंकाने वाले खुलासे होते गए. साफ हुआ कि एसएस दास की कोयलांचल के  बालू माफिया मिलकर हत्या करा दिए हैं, जिससे कि  बालू घोटाले की जांच आगे नहीं बढ़ सके. 

28 अप्रैल 1982 को की गई थी ऑडिटर एसएस दास की हत्या 
 
उनकी हत्या 28 अप्रैल 1982 को की गई थी. जांच आगे बढ़ी तो इस केस में कई लोग अभियुक्त बनाए गए. कई माफिया भी आरोपी बने. कई माफिया पर नकेल कसने की उम्मीद जगी. कुछ को सजा भी मिली तो कई   ट्रायल के दौरान ही स्वर्ग सिधार गए. एक बार फिर बिहार के बालू  को लेकर प्रवर्तन निदेशालय धनबाद के कारोबारियों के ठिकाने पर छापेमारी कर रहा है. इस छापेमारी की चर्चा सिर्फ धनबाद में ही नहीं बल्कि रांची ,पटना और दिल्ली तक हो रही है. जिस सिंडिकेट के यहां  कार्रवाई चल रही है, उसमें कहा तो यह भी जा रहा है कि बिहार के   बाहुबली भी शामिल है. इसलिए भी  इस जांच की ओर  सबकी निगाहें टिकी हुई है. धनबाद के जिन लोगों के यहां छापेमारी चल रही है, उनमें रितेश शर्मा,  जगनारायण सिंह, सुरेंद्र जिंदल, अशोक जिंदल, मिथिलेश सिंह, पुंज  सिंह शामिल है. इनमें से कोई आर्थिक रूप से कमजोर नहीं है. सबने समय के अनुसार अपनी व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ाई  और आज बड़े नाम और बड़े चेहरे बन गए है.

कौन कैसे कैसे ऊंचाई तक पंहुचा 

जगनारायण सिंह तो अपने पिता नवरंग देव सिंह के समय से ही बालू और कोयले के कारोबार से जुड़े हुए है. हाल के दिनों में कारोबार को और आगे बढ़ाया, धनबाद विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके है. धनबाद सिटी  सेंटर में  साझेदार भी रह चुके है. पुंज  सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह पहले झरिया में रहते थे. बिहार के बालू कारोबार में  इनकी पकड़ बहुत ही मजबूत है. शराब के भी कारोबारी है. औरंगाबाद और भोजपुर  के बालू के भरोसे इन्होंने अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाई , उसके बाद यह बिहार के बाहुबली ग्रुप से बालू के काम में जुड़ गए. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने धनबाद के मेमको  मोड में गृह प्रवेश कराया है. सुरेंद्र  जिंदल के बारे में कहा जाता है कि स्क्रैप के कारोबार से इन्होंने व्यवसाय में एंट्री मारी. कोयला ट्रांसपोर्टिंग का काम भी किया. बालू के कारोबार में जगनारायण सिंह और पुंज  सिंह ने  प्रवेश कराया. अशोक जिंदल के बारे में कहा जाता है कि सुरेंद्र जिंदल के भाई है. 

कोई स्क्रैप तो कोई कोयले के कारोबार से बालू में शिफ्ट हुआ 
 
वह भी स्क्रैप कारोबार से ही आगे बढ़े , इन्होंने भी कोयला ट्रांसपोर्टिंग की. प्रत्यक्ष तौर पर सुरेंद्र जिंदल ही बालू के कारोबार में शामिल हुए, दोनों भाइयों में व्यवसायिक बटवारा हो गया है. मिथिलेश सिंह के बारे में कहा जाता है कि मूल रूप से यह कोयला के कारोबारी है. भूली  की  प्रसिद्ध जालान  फैक्ट्री में भी इनका निवेश है. फिर यह पुंज  सिंह के साथ बालू के कारोबार से जुड़ गए. रितेश शर्मा के बारे में बताया जाता है कि उनका मुख्य कारोबार रियल स्टेट है लेकिन कहीं न कहीं उनकी भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से बालू के कारोबार में भूमिका रही होगी, तभी  ईडी  के निशाने पर आए है. चर्चा यह भी है कि धनबाद के जिन  कारोबारियों के यहां ईडी ने दबिश दी है, वहां से  रियल स्टेट से लेकर कोयला कारोबार तथा अन्य जगहों पर निवेश के सबूत मिले है. वैसे कोयलांचल में सोमवार से सिर्फ एक ही चर्चा चल रही है  और वह चर्चा है  छापेमारी की. पूरा कोयलांचल सहित बिहार भी इस  छापेमारी के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहा है. जानना चाह रहा है कि यहां के  कारोबारी सीधे कारोबार से जुड़े हुए हैं या मुखौटा बन  कर काम कर रहे है.इस बड़ी कार्रवाई में अधिकृत जानकारी की सभी प्रतीक्षा कर रहे है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो