रांची (RANCHI) : आखिर उन कागजातों में ऐसा क्या है, जो उसे उत्पाद विभाग ट्रक में आधी रात भर कर ले जाना पड़ा था? यह सवाल है राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मारंडी का, जिसका जवाब वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछ रहें हैं.

अब झारखंड की राजनीति में पक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार देखने को मिलता है. पर इन दिनों नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मारंडी अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं. अब मामला है बीते मंगवार का, जिस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने मौजूद सरकार पर सवालिया लिहाज़ में गंभीर आरोप लगाए हैं, और ना सिर्फ सरकार को बल्कि उन्होंने डीजीपी पर भी निशाना साधा है. बाबूलाल ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर लिखा,

"माननीय मुख्यमंत्री श्री 
@HemantSorenJMM जी,
मंगलवार की रात एक चौंकाने वाली घटना की जानकारी मिल रही है. हमें बताया गया है कि उत्पाद विभाग से एसीबी द्वारा भारी मात्रा में कागजात रात के अंधेरे में ले जाए गए. यह किसी भी प्रकार की सामान्य डे-टू-डे प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह से गुप्त और संदिग्ध परिस्थितियों में अंजाम दिया गया. आश्चर्य की बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई राज्य में अवैध रूप से पद पर बैठे डीजीपी के सीधे हस्तक्षेप एवं निगरानी में हुई. 

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि—
➡️ आखिरकार एक ट्रक भरकर कागजात आधी रात को ही क्यों हटाए गए?
➡️ क्या एसीबी और उत्पाद विभाग के भीतर किसी बड़े भ्रष्ट खेल की तैयारी चल रही है?
➡️ क्या यह कार्रवाई कुछ चुनिंदा अधिकारियों और राजनीतिक सरगनाओं को बचाने के लिए की गई है?

हमारी जानकारी के अनुसार, यह कदम सीधे-सीधे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने और आने वाले समय में ED अथवा CBI की एंट्री से पहले जमीन तैयार करने का प्रयास प्रतीत होता है. यानी भ्रष्टाचार और घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. 

माननीय मुख्यमंत्री जी, यह आपकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि राज्य की जनता के हितों की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि एक भी साक्ष्य नष्ट न हो. जनता यह जानने का हक रखती है कि—किसे बचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है और किसके इशारे पर सबूत मिटाए जा रहे हैं. क्या किसी भी विभाग के काग़ज़ात बिना फ़ोटो स्टेट करवाये एवं विधिवत विस्तार पूर्वक ज़ब्ती सूचि बनवाये बिना रात के अंधेरे में गुप-चुप तरीक़े से उठाकर ले जाने का प्रावधान है? क्या यह आपकी जानकारी और सहमति से हुआ है या नहीं?

कल अख़बारों से यह भी पता चला कि पहले भी एसीबी वाले कुछ ऐसे फ़ाइल उठाकर ले गये हैं जिसके चलते अभी शराब दुकानों के अगले आवंटन में मुश्किल हो रही है और इस वजह से राजस्व की हानि संभावित है. 

मुख्यमंत्री जी, इस गंभीर मामले का संज्ञान लीजिये. इतिहास गवाह है कि चाहे चोर कितना भी चालाक और शातिर क्यों न हो, अंततः कोई न कोई सुराग ज़रूर छोड़ जाता है. यही सुराग एक दिन पूरे खेल को बेनकाब करेंगे. 
धन्यवाद."

अब यहाँ मुख्यमंत्री से न सिर्फ गंभीर सवाल किए गए हैं, बल्कि उत्पाद विभाग पर भी कई संगीन आरोप लगते नज़र आ रहे हैं. हालांकि नेता प्रतिपक्ष का सवाल पूछना लाज़मी भी है क्यूंकी रात के अंधेरे में ट्रक भर कर कागजातों का एसीबी द्वारा का ले जाना न सिर्फ मुख्यमंत्री, बल्कि उक्त मंत्री, विभागीय सचिव और अन्य अधिकारियों को भी शक के घेरे में खड़ा कर रहा है. वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से सबूत मिटाने की कोशिश हो रही है. ऐसे में अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं.