Ranchi- कस्टोडियल डेथ पर सख्त रवैया अख्तियार करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने सभी जिला न्यायाधीशों से उनके पास पेंडिंग मामलों की जानकारी मांगी है. दरअसल झारखंड में कस्टोडियल डेथ को लेकर मुमताज अंसारी के द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है. जिसकी सुनवाई चीफ जस्टिस एसके मिश्र और आनंद सेन की खंडपीठ में हो रही है. मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता शादाब अंसारी ने कोर्ट से पुलिस हिरासत में मौत या जेल में मौत होने पर उसकी अनिवार्य न्यायिक जांच की मांग की.

सीआरपीसी की धारा 176 (1बी) का दिया हवाला

अधिवक्ता शादाब अंसारी ने अदालत को बताया कि सीआरपीसी की धारा 176 (1बी) में हर कस्टोडियल डेथ पर अनिवार्य रुप से न्यायिक जांच का प्रावधान है. राज्य में अब तक 14 लोगों की मौत पुलिस की हिरासत में हुई है, लेकिन इसमें से नौ मामलों में कोई न्यायिक जांच नहीं की गयी. जबकि तीन मामलों में जिला प्रशासन ने जिला जज को न्यायिक जांच के लिए आवेदन भेजा है, लेकिन अब तक उस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जिसके बाद खंडपीठ ने सभी जिला जजों से रिपोर्ट की मांग कर दी, अदालत ने पूछा है कि उनके पास हिरासत में मौत मामले की न्यायिक जांच के लिए कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है. मामले की अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी.

ध्यान रहे कि (Custodial Death) एक गंभीर मामला है. 'कस्टोडियल डेथ' का अभिप्राय उन सभी मौतों से हैं, जो पुलिस की कस्टडी, मुकदमें की सुनवाई के दौरान या न्यायिक हिरासत में हुई है. एक आंकड़े के अनुसार वर्ष 2018 से अब तक झारखंड में पुलिस की हिरासत में 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि न्यायिक हिरासत में  मौत की संख्या 156 की है. झारखंड में कस्टोडियल डेथ लेकर लोकसभा में  प्रश्न पूछे गयें थें.