रांची(RANCHI): करीब तीन दशक पहले तक दुकानों में सामान कागज के बने ठोंगे में दिये जाते थे. यह ठोंगा एक तरह से पैकेट हुआ करता था. इसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बनाया करता था और गुजर-बसर करता था. लेकिन जब से प्लास्टिक पॉलिथीन का चलन बढ़ा, तो ये घरेलू रोजगार बंद ही हो गया. लेकिन लग रहा है कि अब इसके दिन लौटने वाले हैं. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी लग गई है. चलिये पूरी खबर बताते हैं.
सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है?
कई चीज ऐसी होती हैं, जिसका इस्तेमाल उसके रूप बदलकर कई बार हो जाता है. कई चीजें नष्ट भी हो जाती हैं. लेकिन प्लास्टिक की पॉलिथीन न तो नष्ट होती है. न आसानी से यह डिस्पोज हीं होती है. ना ही इसका कुछ और इस्तेमाल हो पाता है. इसे सिंगल यूज़ प्लास्टिक कहते हैं. बता दें कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक में वस्तुओं की पैकेजिंग से लेकर कॉस्मेटिक्स,दूध का पैकेट,बिस्कुट का पैकेट डिटर्जेंट और शैम्पू का पैकेट ,पॉलीथिन बैग,कचरा बैग ,फ़ूड पैकेजिंग की प्लास्टिक जैसी सामग्रियां भी आती हैं.
1 जुलाई से लग जाएगी देशभर में पाबंदी
केंद्र सरकार के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम 2021 के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है. 1 जुलाई से देशभर में इसपर पाबंदी लग जाएगी. इसके लिए राज्य के सभी नगर निकायों को दिशा&निर्देश दिया जा चुका है. रांची नगर निगम ने भी आदेश जारी किया है. शहर के सभी नागरिकों से अपील के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा.
75 माइक्रोन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक यूज़ करने पर की जाएगी कार्रवाई
उप नगर आयुक्त रजनीश कुमार ने आदेश कहा है कि शहर में एक जुलाई से प्लास्टिक के प्लेट, कप गिलास, कांटा चमच, चाकू, मिठाई के डब्बा को पैक करनेवाले रैपर पर भी रोक लगाई गई है. 2022 तक कोई भी व्यक्ति या दुकानदार 75 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक उत्पाद का भंडारण या उपयोग करता है, तो ऐसे लोगों और प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जाएगी. दिसंबर तक 75 माइक्रोन से अधिक ऊंचाई वाले पॉलिथीन का इस्तेमाल करना है.
2023 में 120 माइक्रोन से अधिक मोटाई का पॉलीथिन किया जायेगा उपयोग
31 दिसंबर के बाद 120 माइक्रोन से अधिक मोटाई वाला पॉलिथीन ही उपयोग किया जायेगा, जारी किए गए आदेश में सभी दुकानदारों से कहा गया है कि 31 दिसंबर 2022 के बाद 120 माइक्रोन से कम मोटाई के लिए प्लास्टिक उत्पाद के आयात भंडारण विक्रय एवं उपयोग दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा. इसलिए दुकानदार से कम मोटाई के प्लास्टिक उत्पादों का आयात नहीं करें ऐसा करने पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर झारखंड नगर पालिका अधिनियम और प्लास्टिक अपशिष्ट 2016 की धाराओं के तहत कार्रवाई भी की जाएगी.
अब क्या होगा विकल्प
सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने कंज्यूमर्स से प्लास्टिक की बजाय इको-फ्रेंडली विकल्प चुनने की अपील की है. केंद्र सरकार ने प्लास्टिक की थैलियों की बजाय कॉटन की थैलियों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है. सर्कुलर में कहा गया है, “प्लास्टिक की थैलियों की जगह नेचुरल क्लोथ का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऑर्गेनिक कॉटन, ऊन या बांस से बने टिकाऊ कपड़े धोने पर प्लास्टिक के रेशे नहीं छोड़ते हैं.”
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