रांची(RANCHI) : एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू दिल्ली पहुंच चुकी हैं. एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में भाजपा के नेताओं ने आज उनका स्वागत किया. इनमें केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा भी शामिल थे. मंगलवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुरमू को एनडीए का प्रत्याशी घोषित किया गया था. द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को अपने क्षेत्र ओडिशा के रायरंगपुर में लोगों से मुलाकात की. मंदिर में पूजा-पाठ किया. गुरुवार को वे भुवनेश्वर से दिल्ली पहुंची. द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को नामांकन दाखिल करेंगी. बता दें कि 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होना है. 

यह भी पढ़ें:

द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर आदिवासी समाज का बढ़ाया सम्मान: भाजपा

भाजपा की राष्ट्रपति उम्मीदवार  द्रौपदी मुर्मू कौन है ?

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था. वह दिवंगत बिरंची नारायण टुडू की बेटी हैं. मुर्मू की शादी श्याम चरम मुर्मू से हुई थी. द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में मयूरभंज जिले के कुसुमी ब्लॉक के उपरबेड़ा गांव के एक संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं. उन्होंने 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद चुनी गईं. 1997 में ही मुर्मू बीजेपी की ओडिशा इकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी बनी थीं. मुर्मू राजनीति में आने से पहले अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम कर चुकी थीं. द्रौपदी मुर्मू ने 2002 से 2009 तक और फिर 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया. द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में दो बार की बीजेपी विधायक रह चुकी हैं और वह नवीन पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थीं. उस समय बीजू जनता दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार ओडिशा में चल रही थी. ओडिशा विधान सभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया. द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा में भाजपा की मयूरभंज जिला इकाई का नेतृत्व किया था और ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं. झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने मुर्मू को शपथ दिलाई थी. 

दो बेटे और पति की मौत के बाद भी जारी रखी सेवा

उनके संघर्ष में त्रासदी की लंबी कहानी है। 2009 में पहले बेटे की मौत हुई. जबकि  दूसरी संतान की मौत सड़क हादसे में 2013 में हो गई. पति भी 2014 में साथ छोड़ गए. लेकिन दर्द को पीकर उन्होंने अपना राजनीतिक और सामाजिक जीवन जारी रखा. द्रौपदी मुर्मू ने जीवन में आई हर बाधा का मुकाबला किया. पति और दो बेटों को खोने के बाद  उनका संकल्प और मजबूत हुआ है. द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काम करने का 20 वर्षों का अनुभव है और वे भाजपा के लिए बड़ा आदिवासी चेहरा हैं.